योगी सरकार ने साक्षरता कर्मियों के बकाया मानदेय भुगतान का रास्ता खोला, 64 जिलों के लिए लगभग ₹397.19 करोड़ आवंटित

*- साक्षर भारत योजना के अंतर्गत जिला एवं ब्लॉक समन्वयकों तथा प्रेरकों के अवशेष मानदेय भुगतान के लिए धनराशि स्वीकृत*
*- प्रेरकों को ₹2,000 और जिला/ब्लॉक समन्वयकों को ₹6,000 प्रतिमाह की दर से होगा भुगतान*
*- भुगतान से पहले अभिलेखों, उपस्थिति और कार्यों का सत्यापन अनिवार्य*
*- संबंधित जनपदों को 31 दिसंबर तक धनराशि व्यय करने और 5 जनवरी 2027 तक उपयोगिता विवरण देने के निर्देश*

*लखनऊ, 02 नवम्बर।* साक्षर भारत योजना से जुड़े कार्मिकों के बकाया मानदेय भुगतान को लेकर योगी सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रदेश के 64 जिलों के लिए करीब ₹397.19 करोड़ की धनराशि आवंटित की गई है। इससे वर्षों से लंबित भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और योजना के अंतर्गत कार्य कर चुके जिला एवं ब्लॉक समन्वयकों तथा प्रेरकों को उनका अवशेष मानदेय मिल सकेगा। कार्मिकों के भुगतान को निर्धारित प्रक्रिया और वित्तीय अनुशासन के साथ आगे बढ़ाने की व्यवस्था की गई है। निर्धारित सत्यापन और समयसीमा के साथ भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण के निदेशक एवं सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी की ओर से जारी आदेश में साक्षर भारत योजना के अंतर्गत 31 मार्च 2018 तक कार्यरत रहे साक्षरता कर्मियों के अवशेष मानदेय भुगतान के लिए धनराशि आवंटित की गई है। आदेश के अनुसार, प्रेरकों को ₹2,000 प्रतिमाह और जिला/ब्लॉक समन्वयकों को ₹6,000 प्रतिमाह की दर से भुगतान किया जाएगा।
*कार्मिकों की वास्तविक उपस्थिति, कार्यों और अभिलेखों का होगा सत्यापन*
मानदेय भुगतान से पहले संबंधित कार्मिकों की वास्तविक उपस्थिति, कार्यों और अभिलेखों का सत्यापन किया जाएगा। जिला स्तर पर उपलब्ध ऑडिट रिपोर्ट तथा अन्य अभिलेखों के आधार पर बकाया राशि का निर्धारण किया जाएगा। आदेश में यह भी निर्देशित किया गया है कि आवंटित धनराशि का उपयोग निर्धारित मद में ही किया जाए और किसी अन्य मद में उसका विचलन न हो।
*31 दिसंबर तक निर्धारित वित्तीय नियमों के अनुसार खर्च होगी धनराशि*
संबंधित जनपदों को 31 दिसंबर 2026 तक निर्धारित वित्तीय नियमों के अनुसार धनराशि खर्च करने के निर्देश दिए गए हैं। व्यय का विवरण और उपयोगिता प्रमाण-पत्र 5 जनवरी 2027 तक निदेशालय को उपलब्ध कराना होगा। भुगतान बैंक खाते के माध्यम से किया जाएगा। आदेश में वित्तीय अनियमितता की स्थिति में संबंधित जनपदीय अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की गई है।
लखनऊ में 23 से 26 नवंबर तक होगा राष्ट्रीय जनजातीय भागीदारी उत्सव
*योगी सरकार सजाएगी जनजातीय कला और शिल्प का राष्ट्रीय मंच, 150 से अधिक शिल्पकार दिखाएंगे हुनर*
*16 राज्यों के 500 से अधिक कलाकार दिखाएंगे संस्कृति के रंग*
*जनजातीय भागीदारी उत्सव में घुमंतू समुदायों की कलाओं को मिलेगा मंच, बहुरूपिया, नट-नटी और कठपुतली होंगे आकर्षण*
*मध्य प्रदेश, बिहार, गुजरात, ओडिशा से लेकर असम तक जुटेंगे कलाकार, जनजातीय उत्सव में दिखेगी देश की सांस्कृतिक विविधता*
*जनजातीय संस्कृति से रूबरू होंगे विद्यार्थी, महोत्सव में संगोष्ठी, चित्रकला प्रदर्शनी और हस्तशिल्प कार्यशालाएं भी होंगी*
*जनजातीय कला और पारंपरिक ज्ञान को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा भागीदारी उत्सव: जयवीर सिंह*

लखनऊ, 2 नवंबर: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लखनऊ में 23 से 26 नवंबर तक जनजातीय कला, संस्कृति, लोक परंपराओं और पारंपरिक हुनर का राष्ट्रीय संगम देखने को मिलेगा। लोकनायक भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान (संस्कृति विभाग) की ओर से 'राष्ट्रीय जनजातीय भागीदारी उत्सव' का आयोजन किया जाएगा। यूपी दर्शन पार्क, गोमती नगर में होने वाले इस चार दिवसीय आयोजन में देश के 16 राज्यों के 500 से अधिक कलाकार प्रस्तुतियों के जरिए जनजातीय जीवन और संस्कृति की विविधता से लोगों को परिचित कराएंगे।
संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि यह आयोजन उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान, समाज कल्याण विभाग, जनजाति विकास विभाग और पर्यटन निदेशालय के संयुक्त तत्वावधान में किया जाएगा। इस आयोजन में मेजबान उत्तर प्रदेश के साथ मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान, गुजरात, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, ओडिशा, झारखंड, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, त्रिपुरा, असम, छत्तीसगढ़ और हरियाणा के कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे।  इन राज्यों के सांस्कृतिक दल लोकनृत्य, संगीत और पारंपरिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपने-अपने क्षेत्रों की जनजातीय विरासत को मंच पर लाएंगे। अन्य राज्यों के कलाकारों को आमंत्रित करने के लिए उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, प्रयागराज के माध्यम से भी प्रयास किए जाएंगे।
*विलुप्त होती लोक विधाएं होंगी महोत्सव का मुख्य आकर्षण*
इस उत्सव में जनजातीय कलाकारों के साथ घुमंतू समुदायों की पारंपरिक कलाओं को भी विशेष स्थान दिया जाएगा। इसमें बीन वादन, जादू, कठपुतली, बहुरूपिया और नट-नटी की प्रस्तुतियां होंगी। लोकनायक भगवान बिरसा मुंडा के जीवन और योगदान पर आधारित रंगोली के साथ नाटक भी आयोजित किए जाएंगे। विलुप्त होती लोक विधाओं को इस आयोजन का मुख्य आकर्षण बनाया जाएगा, ताकि नई पीढ़ी इन पारंपरिक कलाओं से परिचित हो सके। इसके जरिए उन कलाकारों और समुदायों को भी मंच मिलेगा, जो लंबे समय से इन लोक विधाओं को सहेजने और आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।
*शिल्प मेले का भी होगा आयोजन*
इसमें शिल्प मेले का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें 150 से अधिक शिल्पकार अपनी कला और उत्पादों का प्रदर्शन करेंगे। मेले में जनजातीय व्यंजनों, हस्तशिल्प, पारंपरिक आभूषणों और जनजातीय वाद्ययंत्रों की दुकानें लगाई जाएंगी। इसके साथ जनजातीय चित्रकला और हस्तशिल्प की प्रदर्शनी तथा कार्यशालाएं भी आयोजित होंगी। मूंज और गेहूं के डंठल से उपयोगी और सजावटी सामग्री बनाने का प्रदर्शन किया जाएगा। जनजातीय जीवन और परंपराओं को करीब से समझाने के लिए आयोजन स्थल पर ग्रामीण परिवेश भी तैयार किया जाएगा। इसके अलावा जनजातीय संस्कृति और परंपराओं पर आधारित पुस्तकों की बिक्री की व्यवस्था भी होगी।
*मध्य प्रदेश होगा थीम स्टेट, विदेशी कलाकार भी देंगे प्रस्तुतियां*
इस बार जनजातीय भागीदारी उत्सव में मध्य प्रदेश को थीम स्टेट के रूप में शामिल किया गया है। इसके तहत वहां की जनजातीय कला, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को विशेष रूप से प्रस्तुत किया जाएगा। आयोजन में विदेशी कलाकार भी प्रतिभाग करेंगे, जिससे अलग-अलग देशों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को देखने का अवसर मिलेगा। विभिन्न राज्यों के कलाकारों के साथ विदेशी सांस्कृतिक समूहों की भागीदारी से महोत्सव में सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी बढ़ावा मिलेगा।
संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि जनजातीय भागीदारी उत्सव को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने और युवाओं को जनजातीय संस्कृति से जोड़ने के लिए स्थानीय विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। विद्यार्थियों को लोककलाओं, जनजातीय शिल्प, पारंपरिक खानपान और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से परिचित होने का अवसर मिलेगा। इसमें संगोष्ठी, चित्रकला प्रदर्शनी और हस्तशिल्प कार्यशालाओं के माध्यम से जनजातीय समाज के इतिहास, परंपराओं और हुनर पर चर्चा की जाएगी। चार दिवसीय आयोजन में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से लेकर शिल्प और खानपान तक जनजातीय जीवन के विभिन्न पक्षों को एक ही मंच पर लाने की तैयारी है।
सपा जब भी सत्ता में आई, यूपी में तबाही लाई: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 520 करोड़ रुपये से अधिक की 69 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास और लाभार्थियों को चेक व स्वीकृति पत्र वितरण कार्यक्रम को किया संबोधित

- किसी सपाई और कसाई को दुर्गा पूजा से परेशानी है तो अपने घर में शोक मनाए: मुख्यमंत्री योगी

- इसी सप्ताह साढ़े चार हजार दारोगाओं को मिलेंगे नियुक्ति पत्र, छह महीने में एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने का लक्ष्य

- सपा ने रामभक्तों पर गोलियां चलवाईं, हमने पुष्पवर्षा कर राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया: मुख्यमंत्री योगी

- पहले विकास का मतलब केवल सैफई था, अब प्रदेश के सभी 75 जिलों तक पहुंच रही विकास की योजनाएं

गोंडा, 02 नवंबर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सपा जब भी सत्ता में आई, उत्तर प्रदेश में तबाही लाई। उसके शासन में दंगे, कर्फ्यू और अपराध का बोलबाला था। पर्व-त्योहारों से पहले उपद्रव शुरू हो जाते थे। गरीबों के हक और नौजवानों के रोजगार पर डकैती डाली जाती थी। बेटियों और व्यापारियों की सुरक्षा खतरे में रहती थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब प्रदेश में दंगा और कर्फ्यू नहीं है। लोग निर्भय होकर त्योहार मना रहे हैं। सपा और कांग्रेस अपराधियों को प्रश्रय देती हैं, जबकि भाजपा सरकार बदलाव लाती है और आस्था को सम्मान देती है।

मुख्यमंत्री योगी सोमवार को गोंडा के छपिया विकासखंड की ग्राम पंचायत तेजपुर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने गौरा और मनकापुर विधानसभा क्षेत्रों से जुड़ी 520 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 69 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। सड़क, शिक्षा और सेतु से जुड़ी इन परियोजनाओं के साथ विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को चेक, स्वीकृति पत्र और अन्य सामग्री भी वितरित की।

- सपाई और कसाई को परेशानी है तो अपने घर में शोक मनाएं

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले कोई सनातन धर्मावलंबी अपने घर में मां दुर्गा की पूजा करता था तो कोई सपाई और कोई कसाई उसका विरोध करते हुए शिकायत करता था। इसके बाद लखनऊ में बैठी समाजवादी पार्टी की सरकार पूजा पर रोक लगा देती थी। उन्होंने कहा कि इस वर्ष नवरात्र में प्रदेशभर में 67 हजार दुर्गा प्रतिमाएं स्थापित हुईं। किसी सपाई और किसी कसाई को परेशानी होती है तो अपने घर में शोक मनाएं, लेकिन किसी को परेशान न करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले कांवड़ यात्रा में बाधाएं खड़ी की जाती थीं, जबकि अब गाजियाबाद से हरिद्वार के बीच साढ़े चार करोड़ श्रद्धालु कांवड़ यात्रा में शामिल हुए।

- रामभक्तों पर गोली चलाने वालों को दिलाई दो नवंबर की याद

मुख्यमंत्री ने दो नवंबर 1990 की घटना याद दिलाते हुए कहा कि इसी दिन अयोध्या में तत्कालीन सरकार ने रामभक्तों पर गोलियां चलवाई थीं। उन्होंने कहा कि सपा ने रामभक्तों को गोलियों से लहूलुहान किया, जबकि भाजपा सरकार ने रामभक्तों पर पुष्पवर्षा कर राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया।

- गोंडा को 16 हजार करोड़ की परियोजनाएं, तीन हजार करोड़ के निवेश प्रस्ताव

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले विकास का मतलब केवल सैफई था। अब सभी 75 जिलों तक योजनाएं पहुंच रही हैं। गोंडा के लिए साढ़े नौ वर्षों में 16 हजार करोड़ रुपये से अधिक और पूरे देवीपाटन मंडल के लिए लगभग 50 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाएं स्वीकृत हुई हैं। वर्ष 2023 में गोंडा को तीन हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले, जिनमें कई परियोजनाएं धरातल पर उतर चुकी हैं।

उन्होंने कहा कि पहले गोंडा की सड़कें बदहाल थीं और क्षेत्र पिछड़ेपन से जूझ रहा था। अब गोंडा में महाराजा देवी बख्श सिंह मेडिकल कॉलेज और विश्वविद्यालय है। बहराइच में महाराजा सुहेलदेव मेडिकल कॉलेज बन चुका है, जबकि बलरामपुर में अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल कॉलेज का निर्माण अंतिम चरण में है। गोंडा-अयोध्या और बलरामपुर-गोंडा मार्ग के चौड़ीकरण को केंद्र से मंजूरी मिल चुकी है।

- साढ़े चार हजार दारोगाओं को इसी सप्ताह नियुक्ति पत्र

मुख्यमंत्री ने कहा कि छह महीने में एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने की कार्ययोजना तैयार है। अब तक 12 से 15 हजार युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए जा चुके हैं। इसी सप्ताह साढ़े चार हजार दारोगाओं, दीपावली के बाद 35 हजार पुलिस कांस्टेबलों और उसके बाद 42 हजार होमगार्डों को नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे। शिक्षकों और अन्य विभागों में भी भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि अब तक साढ़े नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरियां दी गई हैं।

- अग्निवीरों को 20 प्रतिशत आरक्षण और सीधी भर्ती

मुख्यमंत्री ने कहा कि चार वर्ष की सेवा पूरी कर लौटने वाले अग्निवीरों को पुलिस, पीएसी, होमगार्ड, वन और कारागार सहित विभिन्न विभागों में 20 प्रतिशत आरक्षण और बिना परीक्षा सीधी भर्ती दी जाएगी। उन्होंने कहा कि पदक विजेता खिलाड़ियों को भी डिप्टी एसपी और खेल अधिकारी सहित विभिन्न पदों पर नियुक्तियां दी गई हैं।

- सुरक्षा में सेंध लगाई तो जेल या जहन्नुम

मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि बेटियों और व्यापारियों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों के लिए जेल या जहन्नुम के अलावा तीसरी कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि अब माफिया विकास योजनाओं को रोक नहीं सकते। गोंडा के युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे महानगरों में नहीं जाना पड़ेगा। निवेश से स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा। पराली और गोबर से किसानों की आय बढ़ाने के लिए कंप्रेस्ड बायोगैस परियोजनाएं आगे बढ़ाई जा रही हैं। बाबा पृथ्वीनाथ, मां बाराही और स्वामीनारायण छपिया जैसे आस्था स्थलों का विकास भी कराया जा रहा है।

- सपा में माफिया राज, बसपा में जन्मदिन के नाम पर वसूली: कीर्तिवर्धन

केंद्रीय राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने आरोप लगाया कि सपा सरकार में माफिया राज था, जबकि बसपा सरकार में पार्टी प्रमुख के जन्मदिन के नाम पर जनप्रतिनिधियों से वसूली होती थी। उन्होंने कहा कि पहले बिजली, राशन और महिलाओं की सुरक्षा की समस्या थी। अब किसानों को सिंचाई के लिए बिजली, गरीबों को मुफ्त राशन और महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से रोजगार मिल रहा है। गोंडा में मेडिकल कॉलेज, पुलों और सड़कों का निर्माण हुआ है।

- गौरा में पांच राजकीय इंटर कॉलेज, मनकापुर में बढ़ीं सुविधाएं

गौरा विधायक प्रभात वर्मा ने कहा कि क्षेत्र में अब पांच राजकीय इंटर कॉलेज हैं। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और धार्मिक स्थलों का विकास हुआ है। मनकापुर विधायक रमापति शास्त्री ने किसानों और आमजन को योजनाओं का लाभ मिलने का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री का आभार जताया।

- लाभार्थियों को योजनाओं के तहत चेक, प्रमाण पत्र और चाबियां सौंपीं

मुख्यमंत्री ने आयुष्मान भारत योजना के तहत रामप्रताप को पांच लाख रुपये के स्वास्थ्य बीमा का प्रतीकात्मक कार्ड और मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से संगीता को 85 हजार रुपये का डेमो चेक प्रदान किया। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के लाभार्थी घनश्याम को आवास की प्रतीकात्मक चाबी सौंपी। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूह से जुड़ी रेनू वर्मा को 12.73 करोड़ रुपये का डेमो चेक दिया गया।

पंचायती राज विभाग की गोनार्द स्वच्छता मार्ट योजना के तहत मीना देवी को प्रतीकात्मक चाबी प्रदान की गई। श्रम विभाग की निर्माण कामगार मृत्यु एवं विकलांगता सहायता योजना के तहत झिनकना देवी को दो लाख रुपये का चेक दिया गया। कृषि विभाग की एसएमएएम योजना के अंतर्गत कस्टम हायरिंग सेंटर की लाभार्थी शकुंतला को ट्रैक्टर की चाबी सौंपी गई।

मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत बीनू पांडेय को 1.19 लाख रुपये का चेक, मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना के तहत निर्मला देवी को 80 हजार रुपये का डेमो चेक और प्रमाण पत्र तथा प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मुश्ताक अहमद को 5.60 लाख रुपये का डेमो चेक प्रदान किया गया। मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना के लाभार्थी रामतीरथ को प्रमाण पत्र और स्टडी टेबल वितरण योजना के तहत लकी सिंह को स्टडी टेबल दी गई।

मुख्यमंत्री ने विभागीय स्टालों का निरीक्षण किया, बच्चों का अन्नप्राशन कराया और उन्हें चॉकलेट व खिलौने दिए। गर्भवती महिलाओं की गोदभराई में शामिल होकर पोषण किट वितरित कीं। दिव्यांग महिलाओं को ट्राईसाइकिल और उपहार दिए। बाल संतों ने मंत्रोच्चार से उनका स्वागत किया। विकास कार्यों पर आधारित लघु फिल्म भी दिखाई गई। मुख्यमंत्री ने सात नवंबर के दीपोत्सव पर जरूरतमंद परिवारों के साथ खुशियां बांटने की अपील की।

- कार्यक्रम में ये रहे मौजूद

कार्यक्रम में केंद्रीय राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह, सांसद करण भूषण सिंह, विधायक रमापति शास्त्री, प्रभात वर्मा, विनय कुमार द्विवेदी, प्रतीक भूषण सिंह, प्रेम नारायण पांडेय, बावन सिंह, अजय सिंह, विधान परिषद सदस्य अवधेश कुमार सिंह, घनश्याम मिश्र, भाजपा जिलाध्यक्ष इकबाल बहादुर तिवारी, मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल और जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन उपस्थित रहे।

चक्रवात ‘मुरासु’ हुआ ताकतवर, आंध्र प्रदेश के तट से टकराने का खतरा
-  110 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएं
- बंगाल की खाड़ी में एक सप्ताह के भीतर दूसरा चक्रवाती तूफान, ओडिशा में भारी बारिश का अलर्ट

पश्चिम बंगाल। बंगाल की खाड़ी में उठा चक्रवात ‘मुरासु’ अब शक्तिशाली तूफान में तब्दील हो गया है। मौसम विभाग के मुताबिक, सोमवार सुबह तूफान चेन्नई से करीब 260 किलोमीटर और नेल्लोर से 290 किलोमीटर दूर था। यह लगभग 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। इसके 2 नवंबर की रात से 3 नवंबर की सुबह के बीच आंध्र प्रदेश के ओंगोल के पास तट से टकराने की आशंका है। इस दौरान हवा की रफ्तार 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।
बंगाल की खाड़ी में एक सप्ताह के भीतर यह दूसरा चक्रवाती तूफान है। इससे पहले चक्रवात ‘अर्नब’ ने 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश के तट पर दस्तक दी थी। अब ‘मुरासु’ के चलते दक्षिण और मध्य भारत के कई राज्यों में मौसम का मिजाज बदलने का अनुमान है।
- नौ राज्यों में दिखेगा चक्रवात का असर
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, चक्रवात ‘मुरासु’ का असर मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, तेलंगाना, कर्नाटक और महाराष्ट्र तक देखने को मिल सकता है। ओडिशा में 2 और 3 नवंबर को भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। वहीं, मध्य प्रदेश में 5 नवंबर तक आंधी और बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है।
- यूपी में कोहरा, उत्तराखंड के पहाड़ों पर बारिश-बर्फबारी के आसार
चक्रवात के बीच उत्तर भारत के मौसम में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। उत्तर प्रदेश के देवरिया और कुशीनगर समेत करीब 10 शहरों में सोमवार सुबह कोहरे की चादर छाई रही। बिहार के सुपौल में कोहरे के कारण दृश्यता घटकर महज 60 मीटर रह गई।
उधर, उत्तराखंड के उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग समेत पांच पहाड़ी जिलों में सोमवार को बारिश की संभावना जताई गई है। ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की बर्फबारी भी हो सकती है। मौसम के इस बदले मिजाज से पहाड़ी क्षेत्रों में ठंड बढ़ने के आसार हैं।
'चलो-चलो, उधर चलो, नहीं तो चोट लग जाएगी…’ गोशाला में दिखा सीएम योगी का गोवंश के प्रति स्नेह

- गोरखनाथ मंदिर में गोसेवा के दौरान गोवंश को प्यार से समझाते नजर आए मुख्यमंत्री, अपने हाथों से खिलाया गुड़-रोटी

गोरखपुर, 2 नवंबर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गोवंश के प्रति स्नेह एक बार फिर गोरखनाथ मंदिर की गोशाला में देखने को मिला। सोमवार सुबह गोसेवा के दौरान जब कई गोवंश मुख्यमंत्री के करीब आने और उनका स्नेह पाने के लिए आगे बढ़ने लगे तो योगी उन्हें प्यार से समझाते हुए बोले, ‘चलो-चलो, उधर चलो, नहीं तो चोट लग जाएगी।’ मुख्यमंत्री की यह आत्मीय पुकार सुनकर गोवंश दूसरी ओर चले गए। इसके बाद सीएम योगी ने उन्हें अपने हाथों से गुड़ और रोटी खिलाई और दुलार किया।

गोरखनाथ मंदिर प्रवास के दौरान सोमवार सुबह मुख्यमंत्री की दिनचर्या परंपरागत रही। दिन की शुरुआत उन्होंने मंदिर में शिवावतार महायोगी गुरु गोरखनाथ के दर्शन-पूजन से की। इसके बाद अपने गुरु ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की समाधि स्थल पर पहुंचकर श्रद्धासुमन अर्पित किए और शीश झुकाकर उनका आशीर्वाद लिया।

पूजा-अर्चना के बाद मुख्यमंत्री मंदिर परिसर का भ्रमण करते हुए गोशाला पहुंचे। यहां उन्होंने गोवंश के बीच कुछ समय बिताया। गायों को पुचकारा, दुलारा और अपने हाथों से गुड़-रोटी खिलाई। इस दौरान गोवंश के प्रति उनका सहज और आत्मीय व्यवहार देखने को मिला। गोसेवा के इस दृश्य में मुख्यमंत्री का गोवंश के प्रति लगाव साफ नजर आया।

आईजीआरएस पर फर्जी रिपोर्ट लगाने वालों की अब खैर नहीं, सीएम योगी ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश

- लगातार दूसरे दिन जनता दर्शन में पहुंचे सीएम योगी, करीब 200 लोगों की सुनीं समस्याएं; जमीन कब्जाने वालों पर भी कार्रवाई के आदेश

गोरखपुर, 2 नवंबर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही और गलत रिपोर्ट लगाने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। सोमवार को गोरखनाथ मंदिर में लगातार दूसरे दिन आयोजित जनता दर्शन के दौरान कुछ फरियादियों ने शिकायत की कि उनकी समस्याओं के समाधान के बिना ही आईजीआरएस पोर्टल पर गलत निस्तारण रिपोर्ट लगा दी गई। इस पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को ऐसे मामलों में जिम्मेदारी तय कर कड़ी कार्रवाई करने को कहा।

गोरखनाथ मंदिर परिसर स्थित महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के बाहर आयोजित जनता दर्शन में मुख्यमंत्री ने करीब 200 लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने फरियादियों को भरोसा दिलाया कि किसी को परेशान होने की जरूरत नहीं है। सभी की समस्याओं का प्रभावी समाधान कराया जाएगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रत्येक शिकायत का निस्तारण संवेदनशीलता के साथ समयबद्ध, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण तरीके से किया जाए। मुख्यमंत्री ने फरियादियों से प्राप्त प्रार्थना पत्रों को संबंधित अधिकारियों को सौंपते हुए कहा कि शिकायतों के निस्तारण में केवल औपचारिकता पूरी न की जाए, बल्कि पीड़ित को वास्तविक राहत मिलनी चाहिए। कुछ लोगों ने जमीन पर जबरन कब्जे की शिकायत की। इस पर सीएम योगी ने संबंधित अधिकारियों को कठोर कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी कहा कि जिन मामलों में पीड़ित को लगातार परेशानी उठानी पड़ी है, उनकी जांच कराई जाए और लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाए।

- इलाज के लिए आर्थिक मदद का भरोसा

जनता दर्शन में कई लोग गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए आर्थिक सहायता की मांग लेकर पहुंचे थे। मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वस्त किया कि धन की कमी इलाज में बाधा नहीं बनने दी जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अस्पताल से इलाज का इस्टीमेट प्राप्त करने और अन्य औपचारिकताएं पूरी कराने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। प्रस्ताव जल्द शासन को भेजा जाए, ताकि मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से मरीजों को इलाज के लिए पर्याप्त आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

- दिव्यांग युवती ने मांगा भाई के लिए रोजगार

जनता दर्शन में एक दिव्यांग युवती ने अपने परिवार की आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए इंटरमीडिएट पास भाई के लिए रोजगार की व्यवस्था कराने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को युवती के प्रार्थना पत्र पर उचित कार्रवाई और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दोहराया कि जनता की शिकायतों का निस्तारण शासन की प्राथमिकता है। किसी भी स्तर पर लापरवाही, मनमानी या शिकायतों के फर्जी निस्तारण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

26 नवंबर को संविधान दिवस पर ‘कांग्रेस: संविधान की संहारक’ विषय पर होगा संगोष्ठी का आयोजन

- लोकतंत्र सेनानी संघ की दिल्ली प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में लिया गया निर्णय, पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने राहुल गांधी पर साधा निशाना

नई दिल्ली। लोकतंत्र सेनानी संघ 26 नवंबर को संविधान दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में राज्य स्तरीय संगोष्ठी का आयोजन करेगा। संगोष्ठी का विषय ‘कांग्रेस: संविधान की संहारक’ रखा गया है। इसमें भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, केंद्र सरकार का समर्थन करने वाले राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों को आमंत्रित किया जाएगा।

उक्त आशय की जानकारी एक विज्ञप्ति के माध्यम से प्रशांत शेखर मिश्रा, जनसंपर्क अधिकारी, लोकतंत्र सेनानी संघ ने देते हुए बताया कि इस संबंध में रविवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय सह संरक्षक अश्विनी कुमार चौबे के नई दिल्ली स्थित आवास पर संघ की दिल्ली प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक हुई। बैठक में सर्वसम्मति से संगोष्ठी आयोजित करने का निर्णय लिया गया।

बैठक में दिल्ली के लोकतंत्र सेनानियों को अन्य राज्यों की तर्ज पर समुचित सम्मान, सुविधाएं और पेंशन उपलब्ध कराने की मांग पर भी विस्तार से चर्चा हुई। सदस्यों को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय संपर्क प्रमुख नागेंद्र और दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा के साथ हुई बैठकों तथा इस दिशा में हुई प्रगति की जानकारी दी गई।

बैठक में पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की ओर से चुनाव प्रक्रिया पर उठाए जा रहे सवालों और वोट चोरी के आरोपों पर प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के शासनकाल में बूथ कब्जाने, मतपेटियां लूटने और चुनाव के दौरान हिंसा की घटनाएं होती थीं, वे आज खुद को निर्दोष बताकर दूसरों पर वोट चोरी के आरोप लगा रहे हैं।

चौबे ने सवाल उठाया कि यदि चुनाव में बड़े पैमाने पर वोट चोरी हो रही है तो कांग्रेस उपचुनावों में जीत कैसे हासिल करती है और विभिन्न राज्यों में सरकारें कैसे बनाती है? उन्होंने कहा कि विपक्ष के जीतने पर चुनाव परिणाम स्वीकार करना और हारने पर चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाना जनता को भ्रमित करने जैसा है।

बिहार का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल के शासनकाल में बूथ कैप्चरिंग का दौर रहा है। उनके मुताबिक, आज की कांग्रेस न तो श्रीकृष्ण बाबू के आदर्शों पर चल रही है और न ही अनुग्रह बाबू के सिद्धांतों पर, बल्कि एक परिवार तक सीमित होकर रह गई है।

अश्विनी चौबे ने 1975 में लगाए गए आपातकाल का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जिस पार्टी ने आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों पर अंकुश लगाया, वही आज संविधान की बात कर रही है। संघ की ओर से 26 नवंबर को आयोजित संगोष्ठी में आपातकाल और कांग्रेस के कथित दोहरे रवैये को प्रमुखता से उठाया जाएगा।

बैठक में संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ओपी बब्बर, दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष राजन ढींगरा और प्रदेश महामंत्री राजकुमार सपरा सहित अशोक आहूजा, इंदर तोमर, चमन लाल मौला, विजय कौशिक, हरीश असरी, डॉ. अनिल, अशोक महाजन समेत कई लोकतंत्र सेनानी मौजूद रहे।

दीपोत्सव का एक दशक, अयोध्या के गौरव का नया अध्याय

- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'योगी की पाती' के माध्यम से प्रदेशवासियों को सात नवंबर को अयोध्या आने का दिया निमंत्रण

- 2017 में 1.71 लाख दीयों से शुरू हुआ दीपोत्सव, दस वर्षों में विश्वपटल पर स्थापित हुई रामनगरी की नई पहचान

- भरत के त्याग से समझाया सत्ता का अर्थ, अधिकार नहीं बल्कि दायित्व है शासन का वास्तविक आधार

- आस्था से अर्थव्यवस्था को मिल रही गति, कुम्हारों, पुष्प विक्रेताओं और होटल कारोबारियों के लिए बढ़े अवसर

- जहां प्रकाश है वहां सुरक्षा, सुरक्षा से निवेश और निवेश से विकास व रोजगार: मुख्यमंत्री योगी

- वंचित परिवारों के साथ त्योहार की खुशियां बांटने और स्थानीय कारीगरों के उत्पाद खरीदने की अपील

लखनऊ, 02 नवंबर। अयोध्या का दीपोत्सव अपने दसवें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। वर्ष 2017 में शुरू हुआ यह आयोजन दस वर्षों की यात्रा में रामनगरी के सांस्कृतिक गौरव और सनातन परंपरा की वैश्विक पहचान बन चुका है। दीपोत्सव ने न केवल अयोध्या को विश्वपटल पर नई प्रतिष्ठा दिलाई है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को भी गति दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सात नवंबर को होने वाले दीपोत्सव से पहले 'योगी की पाती' के माध्यम से प्रदेशवासियों को संदेश दिया है। उन्होंने लोगों को परिवार और मित्रों के साथ अयोध्या पहुंचकर आयोजन का साक्षी बनने का निमंत्रण दिया है।

मुख्यमंत्री ने 'योगी की पाती' में लिखा कि प्रभु श्रीराम के अयोध्या आगमन की स्मृति से जुड़ा दीपोत्सव अंधकार से प्रकाश, निराशा से आशा और आस्था से विकास की यात्रा का प्रतीक है। यह केवल दीप प्रज्वलन का आयोजन नहीं, बल्कि सनातन चेतना के पुनर्जागरण और भारत के सांस्कृतिक गौरव का महापर्व है। दीप की छोटी सी लौ भी गहन अंधकार में नई आशा जगाने का संदेश देती है।

- दीपोत्सव ने दी उत्सव प्रदेश की पहचान

मुख्यमंत्री योगी ने पत्र में आस्था और अर्थव्यवस्था के संबंध को रेखांकित किया। उन्होंने लिखा कि आस्था और जनभागीदारी को विकास की शक्ति बनाकर उत्तर प्रदेश ने 'उत्सव प्रदेश' के रूप में नई पहचान स्थापित की है। जहां प्रकाश है, वहां सुरक्षा का वास है। जहां सुरक्षा है, वहां निवेश के अवसर हैं। निवेश से विकास होता है और विकास से रोजगार तथा सुख-समृद्धि आती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दीपोत्सव से स्थानीय कारोबार को भी लाभ मिल रहा है। कुम्हारों के बनाए दीयों की मांग बढ़ रही है। पुष्प विक्रेताओं, होटल व्यवसायियों और अन्य स्थानीय व्यापारियों के लिए आय तथा रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। इस प्रकार सांस्कृतिक आयोजन स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रहा है।

- भरत के त्याग से दिया शासन का संदेश

मुख्यमंत्री ने रामायण के प्रेरक प्रसंग के माध्यम से सत्ता और शासन के आदर्शों का उल्लेख किया। उन्होंने लिखा कि प्रभु श्रीराम के वनवास के दौरान भरत ने 14 वर्षों तक राजसुख का त्याग किया। श्रीराम की चरण पादुकाओं को सिंहासन पर प्रतिष्ठित रखकर अयोध्या का शासन संचालित किया। मुख्यमंत्री के अनुसार यह प्रसंग सिखाता है कि सत्ता का वास्तविक अर्थ अधिकार नहीं, बल्कि दायित्व है। अयोध्या का दीपोत्सव त्याग, मर्यादा और समर्पण की इसी भावना को विश्वपटल पर प्रतिष्ठित कर रहा है। यह आयोजन लोगों को अपनी सांस्कृतिक परंपराओं के साथ जीवन मूल्यों से भी जुड़ने का अवसर देता है।

- सरयू तट पर दीपमालाएं, आकाश में ड्रोन की छटा

सात नवंबर को होने वाले दीपोत्सव में सरयू तट और राम की पैड़ी पर भव्य दीपमालाएं सजाई जाएंगी। पारंपरिक दीपों के साथ आधुनिक ड्रोन प्रस्तुतियां और कलाकारों की सहभागिता आयोजन को भव्य बनाएगी। मुख्यमंत्री ने पत्र में सरयू तट की दीपमालाओं का वर्णन करते हुए लिखा कि राम की पैड़ी पर लाखों दीपों की जगमगाहट से ऐसा प्रतीत होता है, मानो अयोध्या में स्वयं आकाशगंगा उतर आई हो। उन्होंने इस आयोजन को परंपरा और आधुनिकता के सुंदर संगम के रूप में प्रस्तुत किया है।

- वंचित परिवारों के घर भी रोशन करने की अपील

मुख्यमंत्री योगी ने प्रदेशवासियों से त्योहार की खुशियां जरूरतमंद परिवारों के साथ बांटने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आसपास कोई वंचित परिवार हो तो अपने सामर्थ्य के अनुसार उसे दीये, मिठाइयां और नए वस्त्र भेंट कर उसकी दीपावली भी आलोकित करें। यही दीपोत्सव की सच्ची भावना है। उन्होंने स्थानीय कारीगरों के बनाए दीप और अन्य उत्पाद खरीदकर उनके परिश्रम को प्रोत्साहन देने की अपील भी की। युवाओं से सकारात्मक ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने, नकारात्मकता से दूर रहने और आसपास स्वच्छता बनाए रखने को कहा। मुख्यमंत्री ने लिखा कि स्वच्छता में ही श्री अर्थात लक्ष्मी जी का वास है।

- दीपोत्सव के नाम लगातार दर्ज होते रहे विश्व कीर्तिमान

अयोध्या में वर्ष 2017 में पहली बार 1.71 लाख दीयों से दीपोत्सव की शुरुआत हुई थी। वर्ष 2018 में 3.01 लाख, 2019 में 4.04 लाख और 2020 में कोरोना प्रतिबंधों के बीच 6.06 लाख दीये जलाए गए।

वर्ष 2021 में 9,41,551 दीयों के साथ गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बना। इसके बाद वर्ष 2022 में 15,76,955 और 2023 में 22.23 लाख दीयों से नए कीर्तिमान स्थापित हुए। राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद वर्ष 2024 के पहले दीपोत्सव में 25.12 लाख दीये प्रज्वलित किए गए। वर्ष 2025 में 26.17 लाख दीयों से पिछला रिकॉर्ड तोड़ा गया। इसी आयोजन में 2,128 लोगों ने एक साथ आरती कर एक और विश्व कीर्तिमान बनाया। इस तरह दस वर्षों में दीपोत्सव ने अयोध्या की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाई दी है।

टेंपल डिवाइसः जानिए कैसे काम करती है यह खास तकनीक

- अमरेश द्विवेदी

क्रिकेट में खिलाड़ियों की तैयारी अब केवल बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फिटनेस तक सीमित नहीं रह गई है। आधुनिक तकनीक की मदद से खिलाड़ी अपने शरीर की प्रतिक्रियाओं और शारीरिक प्रदर्शन को बेहतर ढंग से समझने की कोशिश कर रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण भारतीय वनडे और टेस्ट टीम के कप्तान शुभमन गिल हैं, जो न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में अभ्यास के दौरान माथे पर एक खास डिवाइस लगाए नजर आए। इस डिवाइस का नाम टेंपल (TEMPLE) है, जिसे जाेमैटाे (Zomato) के सह-संस्थापक दीपिंदर गोयल की कंपनी ने विकसित किया है।

बता दें कि, भारत और न्यूजीलैंड के बीच पांच मैचों की वनडे सीरीज आगामी 4 नवंबर, 2026 से शुरू होने वाली है। इससे पहले गिल के माथे पर लगे छोटे-से उपकरण ने क्रिकेट प्रशंसकों और तकनीक में रुचि रखने वाले लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। आमतौर पर खिलाड़ी फिटनेस बैंड और स्मार्टवॉच के जरिए हृदय गति, नींद और शारीरिक गतिविधियों पर नजर रखते हैं लेकिन टेंपल का उद्देश्य मस्तिष्क में रक्त प्रवाह से जुड़े संकेतों और शरीर की शारीरिक प्रतिक्रियाओं का आकलन करना है।

हालांकि, गिल ने सार्वजनिक रूप से यह नहीं बताया है कि उन्होंने इस डिवाइस का इस्तेमाल किस खास उद्देश्य से किया। इसलिए उनके डिवाइस पहनने को किसी बीमारी की जांच या विशेष चिकित्सकीय जरूरत से जोड़ना उचित नहीं होगा। इसकी संभावित कीमत लगभग ₹84,999 से ₹85,000 के आसपास है और इसके प्री-ऑर्डर 1 नवंबर 2026 से शुरू होने वाले हैं। यह कोई प्रमाणित मेडिकल या डायग्नोस्टिक डिवाइस नहीं है बल्कि एक वेलनेस और रिसर्च आधारित गैजेट है।

गाैरतलब है कि, इसका इस्तेमाल भारतीय क्रिकेटर शुभमन गिल के अलावा स्टार भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु और जाेमैटाे के सह-संस्थापक दीपिंदर गोयल करते देखे गए हैं। टेंपल एक छोटा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है, जिसे सिर के कनपटी वाले हिस्से में, माथे और कान के बीच लगाया जाता है। इसे त्वचा पर चिपकाने के लिए विशेष एडहेसिव स्ट्रिप्स का इस्तेमाल किया जाता है। इसका डिजाइन ऐसा है कि इसे रोजमर्रा की गतिविधियों और शारीरिक अभ्यास के दौरान पहना जा सके। सामान्य फिटनेस ट्रैकर मुख्य रूप से कलाई या उंगली से मिलने वाले संकेतों के आधार पर शरीर की गतिविधियों का विश्लेषण करते हैं। इसके विपरीत, टेंपल सिर के पास से ऑप्टिकल संकेत एकत्र करता है और उनका विश्लेषण करके कुछ विशेष मापदंड प्रस्तुत करता है। इस डिवाइस के दो प्रमुख फीचर हैं- ब्रेनफ्लो और एंट्रॉपी स्कोर। पहला मस्तिष्क में रक्त प्रवाह से संबंधित बदलावों के संकेतों पर केंद्रित है, जबकि दूसरा शरीर की शारीरिक सक्रियता और उस पर पड़ने वाले दबाव से जुड़े संकेतों को एक संख्यात्मक स्कोर के रूप में दिखाता है।

टेंपल का पहला प्रमुख फीचर ब्रेनफ्लो है। इसका उद्देश्य मस्तिष्क में रक्त प्रवाह से संबंधित बदलावों को ट्रैक करना है। मस्तिष्क को सामान्य रूप से काम करने के लिए पर्याप्त रक्त और ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। इसलिए मस्तिष्क में रक्त संचार से जुड़े बदलावों का अध्ययन चिकित्सा विज्ञान और न्यूरोसाइंस में महत्वपूर्ण माना जाता है।

ब्रेनफ्लो के माध्यम से टेंपल सिर की कनपटी के पास स्थित ऊतकों और रक्त वाहिकाओं से मिलने वाले संकेतों का विश्लेषण करता है। इसके बाद सॉफ्टवेयर इन संकेतों के आधार पर मस्तिष्क में रक्त प्रवाह से जुड़े बदलावों का अनुमान लगाने का प्रयास करता है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि ब्रेनफ्लो को मस्तिष्क में रक्त प्रवाह से संबंधित संकेतों का आकलन करने वाला मापदंड समझना चाहिए। इसे मस्तिष्क तक पहुंचने वाले रक्त की वास्तविक मात्रा का प्रत्यक्ष और पूर्ण माप नहीं माना जा सकता। त्वचा, खोपड़ी और आसपास के ऊतकों में रक्त प्रवाह भी सेंसर के परिणामों को प्रभावित कर सकता है।

कंपनी ने इस तकनीक की तुलना स्थापित चिकित्सा मापन विधियों से करने वाले शुरुआती अध्ययन भी साझा किए हैं। हालांकि, इसकी सटीकता और अलग-अलग परिस्थितियों में विश्वसनीयता का आकलन करने के लिए व्यापक तथा स्वतंत्र वैज्ञानिक सत्यापन जरूरी है। टेंपल का दूसरा प्रमुख फीचर एंट्रॉपी स्कोर है। यह 1 से 250 के बीच एक संख्यात्मक स्कोर देता है और इसे शरीर की शारीरिक सक्रियता तथा ऊर्जा की मांग में होने वाले बदलावों को समझने के लिए विकसित किया गया है।

कंपनी के अनुसार, नींद, तनाव, व्यायाम, कैफीन का सेवन और ध्यान जैसी गतिविधियां इस स्कोर को प्रभावित कर सकती हैं। कम स्कोर अपेक्षाकृत आराम की स्थिति से जुड़ा हो सकता है, जबकि अधिक स्कोर शारीरिक सक्रियता या बढ़ी हुई शारीरिक मांग के दौरान दिखाई दे सकता है। यह स्कोर लगातार अपडेट होने के लिए बनाया गया है।

उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति आराम करने के दौरान और कठिन व्यायाम के बाद अपने स्कोर की तुलना कर सकता है। इसी तरह, वह अलग-अलग दिनों में नींद और शारीरिक गतिविधियों के साथ अपने आंकड़ों में होने वाले बदलावों को देख सकता है। हालांकि, एंट्रॉपी स्कोर एक कंपनी-विशिष्ट मापदंड है। इसे तनाव, थकान या किसी बीमारी का निश्चित माप नहीं मानना चाहिए। इसकी गणना किस तरह की जाती है और यह शरीर की अलग-अलग अवस्थाओं को कितनी सटीकता से दर्शाता है, यह स्वतंत्र वैज्ञानिक प्रमाणों से स्थापित होना आवश्यक है।

टेंपल की कार्यप्रणाली में पीपीजी यानी फोटोप्लेथिस्मोग्राफी तकनीक की भूमिका बताई जाती है। इस तकनीक का इस्तेमाल कई स्मार्टवॉच और फिटनेस बैंड में भी किया जाता है। पीपीजी में सेंसर त्वचा पर प्रकाश डालता है और ऊतकों से वापस आने वाले प्रकाश में होने वाले बदलावों को मापता है। रक्त वाहिकाओं में रक्त की मात्रा बदलने पर प्रकाश के अवशोषण और परावर्तन में भी बदलाव आ सकता है। सेंसर इन परिवर्तनों को रिकॉर्ड करता है और सॉफ्टवेयर प्राप्त संकेतों का विश्लेषण करता है।

टेंपल में सिर के कनपटी वाले हिस्से से संकेत एकत्र किए जाते हैं। इसके बाद डिवाइस का सिस्टम इन संकेतों को संसाधित करके ब्रेनफ्लो और एंट्रॉपी जैसे मापदंड तैयार करने में मदद करता है।

यह समझना जरूरी है कि पीपीजी अपने आप मस्तिष्क की विद्युत गतिविधियों को रिकॉर्ड नहीं करता। यह EEG यानी इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राफी से अलग तकनीक है, जिसमें मस्तिष्क की विद्युत गतिविधि मापी जाती है। इसी तरह, प्रकाश आधारित संकेतों से मस्तिष्क में रक्त प्रवाह का सटीक आकलन करने के लिए विशेष एल्गोरिदम और वैज्ञानिक सत्यापन की आवश्यकता होती है।

टेंपल से प्राप्त संकेतों का विश्लेषण करने के बाद संबंधित जानकारी मोबाइल ऐप पर दिखाई जाती है। इससे उपयोगकर्ता समय के साथ अपने आंकड़ों में होने वाले बदलावों को देख सकते हैं और अलग-अलग गतिविधियों के दौरान प्राप्त परिणामों की तुलना कर सकते हैं।

इस प्रक्रिया को तीन चरणों में समझा जा सकता है। डेटा संग्रह- सेंसर त्वचा और रक्त वाहिकाओं से संबंधित ऑप्टिकल संकेत रिकॉर्ड करता है। डेटा विश्लेषण- डिवाइस का सिस्टम इन संकेतों का विश्लेषण करके संबंधित मापदंड तैयार करता है। वहीं, प्राप्त परिणाम ऐप के जरिए उपयोगकर्ता को माेबाइल पर दिखाए जाते हैं। इस तरह का लगातार डेटा व्यक्ति को अपनी शारीरिक प्रतिक्रियाओं के पैटर्न समझने में मदद कर सकता है। हालांकि, आंकड़ों में बदलाव का कारण केवल एक गतिविधि को मान लेना सही नहीं होगा क्योंकि शरीर की प्रतिक्रिया कई कारकों से प्रभावित हो सकती है।

क्रिकेट जैसे प्रतिस्पर्धी खेल में खिलाड़ियों को शारीरिक क्षमता के साथ-साथ आराम, रिकवरी और लगातार अभ्यास के बीच संतुलन बनाए रखना पड़ता है। अंतरराष्ट्रीय दौरों में लंबी यात्रा, मौसम में बदलाव, समय क्षेत्र का अंतर और व्यस्त कार्यक्रम भी खिलाड़ियों की दिनचर्या को प्रभावित कर सकते हैं। टेंपल जैसे उपकरण भविष्य में खेल वैज्ञानिकों और खिलाड़ियों को शारीरिक प्रतिक्रियाओं का अध्ययन करने में सहायता दे सकते हैं। इनके आंकड़ों से यह समझने की कोशिश की जा सकती है कि अलग-अलग गतिविधियों, आराम और अभ्यास के दौरान शरीर के संकेत किस तरह बदलते हैं। लेकिन यह दावा करना जल्दबाजी होगी कि टेंपल पहनने से किसी खिलाड़ी की एकाग्रता, बल्लेबाजी या प्रदर्शन अपने आप बेहतर हो जाएगा। इसकी उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसके मापदंड कितने विश्वसनीय हैं और उनका खेल प्रदर्शन से क्या संबंध स्थापित होता है।

टेंपल जैसी उभरती तकनीक के लिए वैज्ञानिक सत्यापन सबसे महत्वपूर्ण है। कनपटी के पास मौजूद त्वचा, खोपड़ी और रक्त वाहिकाओं से मिलने वाले संकेतों को अलग-अलग पहचानना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसलिए डिवाइस की रीडिंग को सीधे मस्तिष्क के स्वास्थ्य का प्रमाण नहीं माना जा सकता। इसके अलावा, एंट्रॉपी स्कोर को भी किसी बीमारी की पहचान करने या चिकित्सकीय निर्णय लेने का विकल्प नहीं समझना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को लगातार सिरदर्द, चक्कर या अन्य चिंताजनक लक्षण हों, तो उसे डिवाइस के आंकड़ों पर निर्भर रहने के बजाय योग्य चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए।

खिलाड़ियाें के माथे पर दिखाई देता टेंपल डिवाइस खेल और आधुनिक तकनीक के बीच बढ़ते संबंध का एक दिलचस्प उदाहरण है। ब्रेनफ्लो एंट्रॉपी स्कोर और प्रकाश आधारित सेंसरों के जरिए यह उपकरण शरीर की शारीरिक प्रतिक्रियाओं को समझने का एक नया तरीका प्रस्तुत करने का प्रयास करता है। फिलहाल, इसे व्यक्तिगत वेलनेस और अनुसंधान की संभावनाओं वाले उपकरण के रूप में देखना अधिक उचित है। इसकी सटीकता, उपयोगिता और वास्तविक लाभों का आकलन आगे होने वाले स्वतंत्र वैज्ञानिक अध्ययनों से ही किया जा सकेगा। यदि यह तकनीक विश्वसनीय साबित होती है तो भविष्य में यह फिटनेस, खेल विज्ञान और शरीर की प्रतिक्रियाओं के अध्ययन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

(लेखक, हिन्दुस्थान समाचार से संबद्ध हैं।)

सीएम योगी ने प्रदेशवासियों को लिखी 49वीं पाती, दीपोत्सव पर अयोध्या आने का दिया न्योता

 

- बोले- दीपोत्सव सनातन चेतना के पुनर्जागरण और सांस्कृतिक गौरव का महापर्व, त्याग, मर्यादा और समर्पण का देता है संदेश

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों के नाम अपनी 49वीं पाती लिखकर दीपोत्सव की शुभकामनाएं दी हैं। इस बार उनकी पाती का केंद्र अयोध्या का भव्य एवं दिव्य दीपोत्सव है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से परिवार और मित्रों के साथ प्रभु श्रीराम की पावन नगरी अयोध्या पहुंचकर दसवें भव्य दीपोत्सव की दिव्य छटा का साक्षी बनने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सप्तपुरियों में श्रेष्ठ श्री अयोध्या धाम अपने दसवें दीपोत्सव के स्वागत के लिए पुलकित है। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में दीपोत्सव को केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन चेतना के पुनर्जागरण और सांस्कृतिक गौरव का महापर्व बताया। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम के अयोध्या आगमन की स्मृति से जुड़ा यह पर्व हमारी परंपराओं के साथ जीवन-मूल्यों को भी आत्मसात करने की प्रेरणा देता है। दीपोत्सव से हमारा सनातन संबंध केवल परंपराओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह त्याग, मर्यादा, सेवा और समर्पण जैसे जीवन-मूल्यों से भी जुड़ा है।

सीएम योगी ने भरत जी के त्याग और समर्पण का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने 14 वर्षों तक राजसुख का त्याग किया और प्रभु श्रीराम की चरण पादुकाओं को सिंहासन पर प्रतिष्ठित रखकर शासन किया। उनका जीवन सिखाता है कि सत्ता का वास्तविक अर्थ अधिकार नहीं, बल्कि दायित्व और समर्पण है। दीपोत्सव इन्हीं आदर्शों को विश्वपटल पर प्रतिष्ठित करने का माध्यम बन रहा है।

मुख्यमंत्री ने अयोध्या के दीपोत्सव की भव्यता का वर्णन करते हुए कहा कि मां सरयू के तट पर सजी दीपमाला और राम की पैड़ी पर लाखों दीपों की जगमगाहट ऐसा दृश्य प्रस्तुत करती है, मानो धरती पर आकाशगंगा उतर आई हो। यह आयोजन आस्था, संस्कृति और जनभागीदारी का अद्भुत संगम बन चुका है।

उन्होंने दीपोत्सव के आर्थिक और सामाजिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि इससे कुम्हारों, पुष्प विक्रेताओं, होटल व्यवसायियों और स्थानीय व्यापारियों को रोजगार एवं आय के नए अवसर मिलते हैं। आस्था और जनभागीदारी को विकास की शक्ति बनाकर उत्तर प्रदेश ने उत्सव प्रदेश के रूप में अपनी नई पहचान स्थापित की है। दीपोत्सव अब आस्था के साथ अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देने वाला आयोजन बन रहा है। सीएम योगी ने प्रदेश की विकास यात्रा को प्रकाश, सुरक्षा, निवेश और रोजगार से जोड़ते हुए कहा कि जहां प्रकाश है, वहां सुरक्षा है। जहां सुरक्षा है, वहां निवेश के अवसर हैं। निवेश से विकास और विकास से रोजगार एवं सुख-समृद्धि के रास्ते खुलते हैं। समृद्धि से उत्सव और उत्सव से उत्तर प्रदेश की पहचान उत्सव प्रदेश के रूप में मजबूत होती है।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से दीपावली पर सामाजिक सहभागिता और सेवा का संकल्प लेने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि अपनी सामर्थ्य के अनुसार वंचित परिवारों को दीये, मिठाइयां और नए वस्त्र भेंट करें, ताकि उनके जीवन में भी खुशियों का उजाला पहुंचे। वंचित परिवारों की दीपावली रोशन करना ही दीपोत्सव की सच्ची भावना है।

युवाओं को संदेश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वे दीपक के प्रकाश की तरह सकारात्मक ऊर्जा से जुड़ें और नकारात्मकता से दूर रहें। साथ ही स्थानीय कारीगरों के बनाए दीये और अन्य उत्पाद खरीदकर उनके परिश्रम को प्रोत्साहित करें। मुख्यमंत्री की 49वीं पाती का संदेश स्पष्ट है कि दीपोत्सव केवल दीप जलाने का पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, सेवा, स्वदेशी, सांस्कृतिक गौरव और समृद्ध उत्तर प्रदेश के संकल्प को आगे बढ़ाने का अवसर भी है।