कोल इंडिया में काम करनेवालों से ज्यादा रिटायर कर्मचारी, पेंशन में खर्च हो जाते हैं 4500 करोड़ रुपये से अधिक
रांची 02 जनवरी 2024 : कोल इंडिया में रिटायर कर्मियों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है| कोल माइंस प्रोविडेंट फंड (सीएमपीएफ) की रिपोर्ट के अनुसार, पेंशन कर्मियों की संख्या काम करनेवालों से डेढ़ लाख अधिक हो गयी है| कोल इंडिया में काम करनेवाले स्थायी कर्मियों की संख्या एक अक्तूबर 2023 को 233048 है. वहीं, रिटायर कर्मियों की संख्या 31 मार्च 2023 को 368546 थी |
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इनको पेंशन देने के मद में हर साल करीब 4500 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो रहा है| पेंशन मद में खर्च हो रही ज्यादा राशि को लेकर सीएमपीएफ के बोर्ड ऑफ ट्रस्टी ने कई बार चिंता जतायी है| ट्रस्टी पेंशन मद में जमा राशि को बढ़ाने को लेकर कोल इंडिया और कोयला मंत्रालय पर दबाव भी बना रहा है| हाल में कोल इंडिया ने 10 रुपये प्रति टन की दर से पेंशन फंड में राशि देना शुरू किया है. इसके बाद फंड में करीब 4367 करोड़ रुपये बीते वित्तीय वर्ष में मिला है |
पेंशन मद में खर्च होता है 4500 करोड़ रुपये से अधिक, आते हैं करीब 4300 करोड़
पेंशन मद में ज्यादा खर्च पर कई बार सीएमपीएफ के बोर्ड ऑफ ट्रस्टी ने जतायी है चिंता
14 फीसदी जाता है पेंशन मद में
कोल इंडिया में कार्यरत कोयला कर्मियों के वेतन से 14 फीसदी पेंशन मद में जाता है. इसमें सात फीसदी कर्मी तथा सात फीसदी कोयला कंपनियों का हिस्सा होता है. यह राशि पेंशन फंड के संचालन के लिए काफी नहीं है. इस कारण कोयला बिक्री से सेस के रूप में भी राशि दी जाती है. केंद्र सरकार ने भी सीएमपीएफ के पेंशन मद में सहयोग कम कर दिया है. वित्त वर्ष 2020-21 में पेंशन निधि में 4503.46



Nov 03 2026, 13:45
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