जिलाधिकारी ने की गौवंश आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं एवं संरक्षण कार्यों की समीक्षा
*छुट्टा गौवंश को पकड़कर गौशालाओं में संरक्षित करने हेतु 04 टीमें गठित कर अभियान चलाने के निर्देश*
*01 सप्ताह बाद सड़कों पर छुट्टा गौवंश विचरण करते पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों की तय की जाएगी जिम्मेदारी*
*जनपद के 26 गौ आश्रय स्थलों में 8257 गौवंश संरक्षित, मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत 2528 लाभार्थियों को 5397 गौवंश किए गए सुपुर्द*
फर्रुखाबाद। जनपद में संचालित गौवंश आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं, गौवंश संरक्षण एवं उनके समुचित भरण-पोषण की समीक्षा बैठक कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी डॉक्टर अंकुर लाठर की अध्यक्षता में आयोजित की गई।
बैठक में जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनपद में निराश्रित एवं छुट्टा गौवंश के संरक्षण के लिए प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित की जाए तथा सभी गौशालाओं में गौवंश के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं शासन की मंशा के अनुरूप उपलब्ध कराई जाएं।
बैठक में जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि नगर क्षेत्र एवं उसके आसपास के क्षेत्रों में विचरण कर रहे छुट्टा पशुओं को पकड़ने के लिए चार टीमों का गठन कर विशेष अभियान चलाया जाए। गठित टीमें नियमित रूप से अभियान चलाकर छुट्टा पशुओं को पकड़ें तथा उन्हें निकटवर्ती गौवंश आश्रय स्थलों में सुरक्षित पहुंचाना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि पकड़े गए पशुओं की ईयर टैगिंग के माध्यम से ट्रेसिंग कराई जाए, जिससे उनके पूर्व पशुपालकों की पहचान की जा सके। यदि कोई पशु पूर्व में किसी पशुपालक का है और उसे निराश्रित छोड़ दिया गया है, तो संबंधित पशुपालक के विरुद्ध पुलिस के माध्यम से सुसंगत धाराओं में नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि इस अभियान के उपरांत एक सप्ताह बाद यदि सड़कों एवं सार्वजनिक स्थानों पर छुट्टा गौवंश के विचरण की शिकायत प्राप्त होती है, तो संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जिम्मेदारी निर्धारित करते हुए उनके विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि आमजन को छुट्टा पशुओं से होने वाली दुर्घटनाओं एवं अन्य समस्याओं से राहत दिलाना प्रशासन की प्राथमिकता है। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
जिलाधिकारी ने सरकारी भूमि पर अवैध रूप से चारा उगाए जाने के संबंध में भी आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सरकारी भूमि पर उगाए गए चारे की कटाई कराई जाए तथा जिन व्यक्तियों द्वारा सरकारी भूमि पर चारा उगाया गया है, उनका चिन्हांकन कर संबंधित अधिकारियों के माध्यम से विस्तृत आख्या उपलब्ध कराई जाए। सरकारी भूमि का उपयोग नियमानुसार सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने समस्त खंड विकास अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने विकासखंड क्षेत्र में स्थापित गौवंश आश्रय स्थलों का नियमित निरीक्षण करें तथा वहां उपलब्ध व्यवस्थाओं, गौवंश के स्वास्थ्य, चारे एवं पेयजल की उपलब्धता का जायजा लें। साथ ही गौशालाओं में उपलब्ध दुधारू गायों को कुपोषित परिवारों को उपलब्ध कराने की कार्यवाही सुनिश्चित करें, जिससे जरूरतमंद परिवारों को पोषण संबंधी लाभ प्राप्त हो सके और गौवंश का भी बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
*शीत ऋतु से पूर्व गौशालाओं में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूर्ण करने के निर्देश*
आगामी शीत ऋतु के दृष्टिगत जिलाधिकारी ने जनपद की समस्त गौशालाओं में गौवंश को ठंड से सुरक्षित रखने के लिए विशेष प्रबंध सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शासन द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार सभी गौशालाओं में टीनशेड, अलाव, आवश्यक दवाइयां, स्वच्छ पेयजल तथा अन्य जरूरी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। गौशालाओं में ठंड से बचाव के लिए पर्याप्त व्यवस्था की जाए, जिससे किसी भी गौवंश को प्रतिकूल मौसम के कारण परेशानी न हो।
उन्होंने गौशालाओं में सीसीटीवी कैमरे स्थापित कराने तथा उनकी नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। साथ ही गौवंश के स्वास्थ्य परीक्षण, समय से उपचार, पर्याप्त हरे एवं सूखे चारे की उपलब्धता तथा साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने को कहा। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी व्यवस्थाओं को समय से पूर्ण कराते हुए गौशालाओं का नियमित अनुश्रवण किया जाए।
बैठक में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ0 धीरज कुमार ने गौवंश संरक्षण की प्रगति की जानकारी देते हुए बताया कि जनपद में वर्तमान में कुल 26 गौवंश आश्रय स्थल संचालित हैं, जिनमें कुल 8257 गौवंश संरक्षित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के अंतर्गत जनपद में कुल 2528 लाभार्थियों को 5397 गौवंश सुपुर्द किए जा चुके हैं। योजना के माध्यम से पात्र लाभार्थियों को गौवंश उपलब्ध कराकर उनके संरक्षण एवं भरण-पोषण को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
जिलाधिकारी ने कहा कि निराश्रित गौवंश का संरक्षण शासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। गौशालाओं में संरक्षित प्रत्येक गौवंश के लिए पर्याप्त चारा, पानी, चिकित्सा एवं सुरक्षित आवास की व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गौवंश संरक्षण से संबंधित सभी कार्यों को गंभीरता से लेते हुए नियमित रूप से प्रगति की समीक्षा करें तथा शासन की मंशा के अनुरूप प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करें।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी विनोद कुमार गौड़, जिला विकास अधिकारी श्याम कुमार तिवारी, उपनिदेशक कृषि अरविंद मोहन, जिला उद्यान अधिकारी राघवेंद्र सिंह, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका विनोद कुमार, जिला प्रोबेशन अधिकारी अनिल कुमार, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ0 धीरज कुमार सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
Nov 04 2026, 06:27
- Whatsapp
- Facebook
- Linkedin
- Google Plus
0